संदेश

बाबूनामा भाग दो

  बाबूनामा भाग दो  डॉ रवीन्द्र पस्तोर  प्रस्तावना  मुझे लगता है कि मैंने अपने जीवन के विभिन्न चरणों में हुई अपनी राजनीतिक और आध्यात्मिक यात्रा को साझा करने की कोशिश की है। मेरे व्यक्तित्व को गहराई से समझने के लिए, आपको इस यात्रा का विश्लेषण को इस तरह समझना होगा।  बचपन में कम्युनिस्ट (Communist): मेरा बचपन में कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित होना यह दर्शाता है कि मैं शायद बचपन से ही समानता और सामाजिक न्याय के विचारों के प्रति संवेदनशील था । कम्युनिज्म में अमीरी-गरीबी का भेद मिटाने और संसाधनों को सभी में समान रूप से बांटने की बात होती है। यह बचपन की स्वाभाविक सरलता और आदर्शवाद को दर्शाता है, जहाँ मैं चाहता था  कि कोई भी भूखा या गरीब न रहे। इसने मेरे अंदर करुणा और आदर्शवादी सोच की नींव रखी होगी। जवानी में सोशलिस्ट (Socialist): मेरा जवानी में सोशलिज्म की तरफ होना एक स्वाभाविक बदलाव था। सोशलिज्म कम्युनिज्म जितना कठोर नहीं होता, बल्कि यह पूंजीवाद के साथ कुछ हद तक सामाजिक कल्याण को भी मिलाता है। इसका मतलब है कि मैं शायद ज्यादा व्यावहारिक और अधिक लचीला हो गया था। ...