संदेश

अक्टूबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

The truth of Bundelkhand, which no one ever told | Lost Glory of Bundelk...

चित्र

अश्वत्थामा सिन्ड्रोम

अश्वत्थामा सिंड्रोम    शापित अमरता  डॉ. रवीन्द्र पस्तोर  प्रस्तावना घाव सूख जाते हैं, घाव, जो दिखते नहीं, सबसे अधिक लहू बहाते हैं, पर कुछ स्मृतियाँ कभी नहीं सूखतीं। पौराणिक गाथाओं के उस चिरंजीवी को, जिसके माथे पर जलता हुआ घाव, एक शाश्वत दंड बन गया था, हमने हमेशा एक मिथक समझा।  कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हुआ, पर उसका सबसे बड़ा दंड आज भी जीवित है। अश्वत्थामा, जिसके माथे पर जलता घाव, उसके प्रतिशोध की असमाप्त कहानी है। यह घाव केवल शरीर का नहीं, बल्कि एक शापित मन का प्रतीक है, जो अतीत की एक भी गलती को माफ़ नहीं कर सकता। यह उपन्यास, 'अश्वत्थामा सिंड्रोम', बताता है कि यह श्राप केवल महाभारत तक सीमित नहीं रहा। सदियां बीत गई लेकिन अश्वत्थामा की पीड़ा कभी ख़त्म नहीं हुई। वह जंगलों में भटकता रहा अदृश्य, लेकिन हमेशा मौजूद।  किवदंतियों ने दुनिया के सबसे अंधेरे कोनों में उसकी उपस्थिति की बात की। एक ऐसा व्यक्ति जो ना तो मरा है और न ही जीवित है। हमेशा अपने क्रोध की कीमत चुका रहा है।   वह योद्धा जिसने प्रतिशोध लेना चाहा, लेकिन जिसे अनन्त पीड़ा मिली। यह कहानी एक चेतावनी...