राय प्रवीन : ओरछा की कोकिला
मेरे द्वारा राय प्रवीन उपन्यास बुन्देलखण्ड के इतिहास के 16 वीं सदी के कालखण्ड के ओरछा की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। उपन्यास की संक्षिप्त निम्नानुसार है -
राय प्रवीन : ओरछा की कोकिला - प्रेम, ज्ञान और निष्ठा की एक अनूठी गाथा राय प्रवीन बुंदेलखंड के ओरछा राज्य की एक प्रतिभाशाली महिला थीं। वह अपनी सुंदरता, गायन, नृत्य और काव्य प्रतिभा के लिए जानी जाती थीं। राजा इंद्रजीत सिंह के प्रति उनके प्रेम के साथ-साथ सम्राट अकबर के दरबार में प्रदर्शित उनकी बुद्धिमत्ता और निष्ठा ने उन्हें इतिहास में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया। उनका जन्म किसी शाही वंश में नहीं हुआ था, लेकिन कला में उनकी निपुणता ने उन्हें ओरछा दरबार में एक विशेष स्थान दिलाया। राजा इंद्रजीत सिंह ने उनके लिए "राय प्रवीण महल" का निर्माण कराया, जो आज भी उनके प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। जब अकबर ने राय प्रवीन को दरबार में बुलाया, तो वह ओरछा के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय था। आगरा जाकर उन्होंने अकबर के समक्ष एक दोहा सुनाया:
“विनती राय प्रवीन की, सुनिए साह सुजान,
झूठी पातर भखत हैं, बारी-बायस-स्वान।”
इस दोहे के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनका हृदय पहले से ही राजा इंद्रजीत सिंह के प्रति समर्पित है। उनकी बुद्धिमत्ता और ईमानदारी से प्रभावित होकर, अकबर ने उन्हें सम्मान के साथ ओरछा लौटने की अनुमति दे दी। राय प्रवीण की कहानी एक ऐसी महिला का उदाहरण है जिसने गरिमा, प्रेम, कला और स्वाभिमान के साथ सम्राट की इच्छाओं का सामना किया। उनका जीवन आज भी हमें सिखाता है कि सच्ची प्रतिभा और ईमानदारी किसी भी शक्ति से कहीं अधिक मूल्यवान है।
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